विवाह प्रमाण पत्र ऑनलाइन आवेदन 2026: राज्यवार प्रक्रिया व दस्तावेज़

विवाह प्रमाण पत्र 2026: ऑनलाइन आवेदन की पूरी गाइड

मुख्य बिंदु: विवाह का कानूनी सरकारी प्रमाण पत्र — स्पाउस वीजा (विदेश यात्रा), बैंक संयुक्त खाता, बीमा नॉमिनी, संपत्ति अधिकार और पासपोर्ट में जीवनसाथी का नाम दर्ज कराने के लिए अनिवार्य · हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) या विशेष विवाह अधिनियम (SMA) के तहत पंजीकरण · सरकारी शुल्क राज्य अनुसार मात्र ₹100 से ₹1,000 · ऑनलाइन आवेदन और मैरिज रजिस्ट्रार सत्यापन।

विवाह प्रमाण पत्र (Marriage Certificate / Vivah Praman Patra) राज्य सरकार के निबंधन एवं राजस्व विभाग द्वारा जारी किया जाने वाला एक आधिकारिक कानूनी दस्तावेज़ है, जो दो व्यक्तियों के वैवाहिक रिश्ते को प्रमाणित करता है। सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक दिशा-निर्देशों के अनुसार भारत में सभी धर्मों और समुदायों के लिए विवाह का अनिवार्य पंजीकरण लागू है। 2026 में निम्नलिखित कार्यों के लिए विवाह प्रमाण पत्र आवश्यक होता है:

  • स्पाउस वीजा (Spouse Visa) आवेदन: अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया या किसी भी देश का पति/पत्नी वीजा प्राप्त करने के लिए सबसे अनिवार्य दस्तावेज़।
  • पासपोर्ट में जीवनसाथी का नाम जुड़वाना: पासपोर्ट री-इश्यू या नए पासपोर्ट में पति/पत्नी का नाम दर्ज कराने हेतु।
  • बैंक में संयुक्त खाता (Joint Account): बैंक, पोस्ट ऑफिस या वित्तीय संस्थानों में संयुक्त खाता खुलवाने के लिए।
  • जीवन बीमा और पीएफ में नॉमिनेशन: एलआईसी, ईपीएफओ, ग्रेच्युटी और पेंशन रिकॉर्ड में नॉमिनी बनाने के लिए।
  • महिला के दस्तावेजों में उपनाम/नाम परिवर्तन: पैन कार्ड, आधार कार्ड या बैंक खाते में विवाह के बाद सरनेम बदलने हेतु कानूनी आधार।
  • विरासत और संपत्ति अधिकार: पारिवारिक संपत्ति के बंटवारे, उत्तराधिकार और किसी अनहोनी की स्थिति में कानूनी सुरक्षा।

विवाह पंजीकरण से संबंधित प्रमुख कानून (Marriage Acts)

1. हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act – HMA)

  • किन पर लागू होता है: हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म के नागरिकों पर।
  • शर्त: धार्मिक या पारंपरिक रीति-रिवाजों (सात फेरे / आनंद कारज आदि) के अनुसार विवाह पहले ही संपन्न हो चुका हो।
  • प्रक्रिया: ऑनलाइन आवेदन के बाद रजिस्ट्रार कार्यालय में दंपती और गवाहों की भौतिक उपस्थिति; 15 से 30 दिनों में प्रमाण पत्र मिल जाता है।

2. विशेष विवाह अधिनियम, 1954 (Special Marriage Act – SMA / कोर्ट मैरिज)

  • किन पर लागू होता है: अंतर्धार्मिक (Inter-faith) विवाह, अंतरजातीय विवाह, एनआरआई (NRI) विवाह या किसी भी धर्म के जोड़े जो सिविल कोर्ट मैरिज करना चाहते हैं।
  • शर्त: मैरिज रजिस्ट्रार कार्यालय में 30 दिनों का सार्वजनिक नोटिस (Notice Period) देना अनिवार्य होता है। यदि 30 दिनों में कोई वैध कानूनी आपत्ति नहीं आती, तो विवाह संपन्न करा दिया जाता है।

पात्रता — Who Can Register

  • न्यूनतम आयु: विवाह के समय वर (लड़का) की आयु कम से कम 21 वर्ष और वधू (लड़की) की आयु कम से कम 18 वर्ष पूरी होनी चाहिए।
  • वैवाहिक स्थिति: दोनों पक्ष अविवाहित होने चाहिए; अथवा पूर्व विवाह से तलाकशुदा (तलाक की कानूनी डिक्री के साथ) या विधवा/विधुर होने चाहिए।
  • कानूनी संबंध: दोनों पक्ष कानून द्वारा निषिद्ध सपिंड या वर्जित संबंधों (Prohibited Relationships) के दायरे में न आते हों।
  • मानसिक सक्षमता: दोनों पक्ष कानूनी सहमति देने में मानसिक रूप से सक्षम हों।

आवश्यक दस्तावेज़ — Documents Required

वर और वधू दोनों के दस्तावेज़

  • पहचान पत्र: दोनों का मूल आधार कार्ड (Aadhaar Card) और पैन कार्ड/वोटर आईडी।
  • आयु प्रमाण पत्र: 10वीं कक्षा की मार्कशीट, जन्म प्रमाण पत्र या पासपोर्ट।
  • वर्तमान निवास प्रमाण: बिजली बिल, राशन कार्ड, वोटर आईडी या मूल निवास प्रमाण पत्र।
  • फोटो: वर और वधू की अलग-अलग पासपोर्ट साइज फोटो तथा विवाह समारोह की संयुक्त फोटो (Couple Photo)।
  • विवाह का शादी कार्ड (Invitation Card): शादी का छपा हुआ निमंत्रण पत्र।
  • शादी की रसीद या पुरोहित प्रमाण पत्र: मंदिर ट्रस्ट, आर्य समाज मंदिर, गुरुद्वारा या निकाहनामा की रसीद/प्रमाण पत्र।
  • शपथ पत्र (Affidavit): निर्धारित स्टांप पेपर पर वैवाहिक स्थिति और भारतीय नागरिकता का नोटरी शपथ पत्र।

गवाहों के दस्तावेज़ (Witnesses)

  • विवाह में शामिल 2 या 3 गवाहों (माता-पिता, सगे-संबंधी या मित्र) के आधार कार्ड, पैन कार्ड और पासपोर्ट साइज फोटो।
  • गवाहों का वयस्क (18 वर्ष से अधिक) होना अनिवार्य है।

ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया — Step-by-Step

  1. अपने राज्य के संबंधित पोर्टल (जैसे UP: igrsup.gov.in, Delhi: edistrict.delhigovt.nic.in, Maharashtra: aaplesarkar, Rajasthan: pehchan) पर जाएं।
  2. “विवाह पंजीकरण” (Marriage Registration) विकल्प चुनें और नया आवेदन शुरू करें।
  3. लागू अधिनियम का चयन करें: हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) या विशेष विवाह अधिनियम (SMA)।
  4. वर और वधू दोनों का संपूर्ण व्यक्तिगत विवरण, माता-पिता का नाम, वैवाहिक स्थिति और आधार नंबर दर्ज करें।
  5. विवाह संपन्न होने की तिथि, विवाह स्थल (मैरिज हॉल/घर/मंदिर का पता) और विवाह कराने वाले पुरोहित/काजी का विवरण भरें।
  6. गवाहों का नाम, पता और पहचान पत्र विवरण दर्ज करें।
  7. सभी आवश्यक दस्तावेज़ (शादी कार्ड, फोटो, पहचान पत्र, शपथ पत्र) स्कैन कर अपलोड करें।
  8. ऑनलाइन निर्धारित पंजीकरण शुल्क (₹100 से ₹500) का भुगतान करें।
  9. सबमिट करने के बाद अपॉइंटमेंट स्लॉट बुक करें और आवेदन रसीद प्रिंट कर लें।
  10. निर्धारित तिथि पर वर, वधू और तीनों गवाह अपने मूल दस्तावेजों के साथ उप-निबंधक (Sub-Registrar / Marriage Registrar) के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।
  11. रजिस्ट्रार द्वारा हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लेने के बाद उसी दिन या 7 से 15 दिनों के भीतर डिजिटल हस्ताक्षरित विवाह प्रमाण पत्र पोर्टल पर जारी कर दिया जाता है।

कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया (Court Marriage Process)

विशेष विवाह अधिनियम (SMA) के तहत कोर्ट मैरिज की प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. वर या वधू में से किसी एक के आवासीय क्षेत्र के मैरिज रजिस्ट्रार कार्यालय में इरादा नोटिस (Notice of Intended Marriage) दाखिल करें।
  2. रजिस्ट्रार कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर 30 दिनों की वैधानिक आपत्ति अवधि के लिए नोटिस प्रकाशित किया जाता है।
  3. 30 दिन पूरे होने पर कोई कानूनी आपत्ति न आने पर विवाह की तारीख तय होती है।
  4. दंपती और 3 गवाह रजिस्ट्रार के समक्ष उपस्थित होकर विवाह घोषणा पर हस्ताक्षर करते हैं।
  5. रजिस्ट्रार उसी समय कोर्ट मैरिज सर्टिफिकेट (Marriage Certificate) जारी कर देता है।

शुल्क संरचना और समय सीमा (Fees & Processing Time)

मद / प्रक्रिया अनुमानित शुल्क समय सीमा
हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) ₹100 – ₹500 (राज्य अनुसार) रजिस्ट्रार विजिट के 7 से 15 दिन
विशेष विवाह अधिनियम (SMA – कोर्ट मैरिज) ₹500 – ₹1,500 30 दिन नोटिस + उसी दिन सर्टिफिकेट
अतिरिक्त प्रति (Duplicate Copy) ₹100 – ₹200 तत्काल या 3 दिन

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अंतिम सत्यापन: 2026. आधिकारिक स्रोत: विभिन्न राज्य राजस्व एवं निबंधन विभाग पोर्टल।

यह वेबसाइट किसी भी सरकारी विभाग से संबंधित नहीं है। यहाँ दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है।

शादी के कई साल बाद क्या विवाह प्रमाण पत्र बनवाया जा सकता है?

हाँ, शादी के कितने भी साल बीत चुके हों, पश्चात्वर्ती पंजीकरण (Post-facto Registration) पूरी तरह कानूनी और मान्य है। शादी का पुराना निमंत्रण पत्र, शादी की तस्वीरें, दोनों का आधार कार्ड और गवाहों के साथ किसी भी समय पंजीकरण कराया जा सकता है।

यदि लड़का और लड़की अलग-अलग धर्म के हों तो किस कानून के तहत विवाह होगा?

अलग-अलग धर्म के जोड़ों का विवाह ‘विशेष विवाह अधिनियम, 1954’ (Special Marriage Act) के तहत संपन्न और पंजीकृत होता है। इसमें किसी भी पक्ष को अपना धर्म बदलने की आवश्यकता नहीं होती।

कोर्ट मैरिज में कुल कितना समय लगता है?

विशेष विवाह अधिनियम के तहत नोटिस दाखिल करने के बाद 30 दिनों की अनिवार्य नोटिस अवधि होती है। 30 दिन पूरे होने पर रजिस्ट्रार के समक्ष शादी संपन्न होते ही उसी दिन विवाह प्रमाण पत्र मिल जाता है। कुल समय लगभग 30 से 35 दिन लगता है।

विवाह पंजीकरण के लिए कितने गवाहों की आवश्यकता होती है?

हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) के तहत सामान्यतः 2 गवाहों की आवश्यकता होती है, जबकि विशेष विवाह अधिनियम (SMA) के तहत 3 गवाहों की भौतिक उपस्थिति अनिवार्य होती है। सभी गवाहों के पास अपना वैध आधार कार्ड होना चाहिए।

विवाह प्रमाण पत्र कहाँ से बनवाना चाहिए?

विवाह प्रमाण पत्र वर के गृह जिले, वधू के गृह जिले अथवा उस जिले के सब-रजिस्ट्रार कार्यालय से बनवाया जा सकता है जहाँ विवाह समारोह वास्तव में संपन्न हुआ था।

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