प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2026: प्रीमियम, दावा और पूरी गाइड
मुख्य बिंदु: खरीफ + रबी + वाणिज्यिक फसलों के लिए फसल बीमा सुरक्षा · किसान प्रीमियम केवल 2% (खरीफ) / 1.5% (रबी) / 5% (वाणिज्यिक/बागवानी) · बाकी प्रीमियम का भुगतान केंद्र व राज्य सरकार द्वारा · आधिकारिक पोर्टल pmfby.gov.in · टोल-फ्री हेल्पलाइन 14447 · आवेदन की अंतिम तिथि: खरीफ के लिए 31 जुलाई, रबी के लिए 31 दिसंबर।
भारतीय किसानों के लिए एक अच्छी फसल और कर्ज के जाल के बीच का फासला अक्सर केवल एक अनिश्चित मानसून होता है। प्राकृतिक आपदाओं, बेमौसम बारिश या सूखे से किसानों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए केंद्र सरकार ने 18 फरवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की शुरुआत की थी। यह न्यूनतम प्रीमियम दर पर किसानों की फसलों को जोखिम से सुरक्षा प्रदान करने वाली देश की सबसे बड़ी बीमा योजना है। योजना की शुरुआत से अब तक 50 करोड़ से अधिक किसान आवेदन कवर किए जा चुके हैं और ₹1.6 लाख करोड़ से अधिक के दावों का निपटान सीधे किसानों के खातों में किया गया है।
PMFBY क्या है — योजना में क्या-क्या कवर होता है
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) किसानों को निम्नलिखित जोखिमों और नुकसान से सुरक्षा प्रदान करती है:
- उत्पादन में नुकसान (Yield Loss): मौसम संबंधी आपदाओं जैसे सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, चक्रवात, बेमौसम बारिश, पाला, लू और आग से फसल को होने वाला नुकसान।
- बुआई न हो पाना (Prevented Sowing): यदि प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण किसान सीजन की शुरुआत में अधिसूचित क्षेत्र में बुआई नहीं कर पाता है।
- कटाई के बाद का नुकसान (Post-Harvest Losses): कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी गई फसलों को चक्रवात, चक्रवाती बारिश या बेमौसम बारिश से 14 दिनों तक होने वाला नुकसान।
- स्थानीयकृत आपदाएं (Localized Calamities): ओलावृष्टि, भूस्खलन, बादल फटना या जलभराव से किसी विशेष खेत या इलाके में हुआ व्यक्तिगत नुकसान।
पात्र फसलें (Eligible Crops)
- खरीफ फसलें: धान (चावल), कपास, सोयाबीन, मक्का, अरहर, मूंग, बाजरा, ज्वार आदि।
- रबी फसलें: गेहूं, चना, सरसों, मसूर, आलू, जौ आदि।
- वाणिज्यिक और बागवानी फसलें: गन्ना, केला, आलू, प्याज, सेब, हल्दी, मिर्च, इलायची, कॉफी, अंगूर, अदरक आदि।
प्रत्येक राज्य सरकार हर सीजन से पहले अपने राज्य के लिए अधिसूचित फसलें और बीमा क्षेत्र इकाइयां (गांव, पंचायत या ब्लॉक स्तर) आधिकारिक तौर पर तय करती है।
पात्रता — कौन से किसान योजना के पात्र हैं
कवर किए जाने वाले किसानों की श्रेणियां
- ऋणी किसान (Loanee Farmers): जिन किसानों के पास सक्रिय किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) या चालू फसली ऋण है, उन्हें बैंक द्वारा स्वतः (ऑटो-एनरोल) शामिल कर लिया जाता है (यदि वे कट-ऑफ तारीख से 7 दिन पहले लिखित में ऑप्ट-आउट न करें)।
- गैर-ऋणी किसान (Non-Loanee Farmers): वे किसान जिन्होंने बैंक ऋण नहीं लिया है, वे आधिकारिक पोर्टल या सीएससी (CSC) के जरिए स्वेच्छा से आवेदन कर सकते हैं।
- बटाईदार और पट्टेदार किसान (Sharecroppers / Tenant Farmers): वैध भूमि-पट्टा समझौता (लीज एग्रीमेंट) या आधार-लिंक्ड बटाई प्रमाण पत्र के साथ आवेदन कर सकते हैं।
भूमि संबंधी शर्तें
- अधिसूचित क्षेत्र में जमीन: जमीन के आकार की कोई ऊपरी सीमा नहीं है — 0.1 हेक्टेयर के छोटे किसान से लेकर बड़े किसान तक सभी पात्र हैं।
- जमीन उस विशेष फसल और मौसम के लिए राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित क्षेत्र में होनी चाहिए (इसकी जांच राज्य पोर्टल पर की जा सकती है)।
प्रीमियम दरें — किसान को कितना प्रीमियम देना होता है
किसान को बीमा राशि (Sum Insured) का केवल एक बहुत छोटा हिस्सा चुकाना होता है; बाकी भारी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सब्सिडी के रूप में वहन करती हैं।
| फसल का प्रकार / सीजन | किसान की प्रीमियम दर | सरकारी सब्सिडी (केंद्र + राज्य) |
|---|---|---|
| खरीफ फसलें (मानसून सीजन) | बीमा राशि का 2% | कुल प्रीमियम का शेष भाग (लगभग 98%) |
| रबी फसलें (सर्दियों का सीजन) | बीमा राशि का 1.5% | कुल प्रीमियम का शेष भाग |
| वाणिज्यिक व बागवानी फसलें | बीमा राशि का 5% (अधिकतम) | कुल प्रीमियम का शेष भाग |
उदाहरण: यदि धान (खरीफ) के लिए प्रति हेक्टेयर बीमा राशि ₹60,000 तय की गई है, तो किसान को सिर्फ ₹1,200 (2%) प्रति हेक्टेयर देना होगा। वास्तविक कुल प्रीमियम यदि ₹6,000 बनता है, तो शेष ₹4,800 सरकार द्वारा सीधे बीमा कंपनी को दिए जाते हैं, जबकि किसान को पूरे ₹60,000 का बीमा कवर मिलता है।
बीमा राशि (Sum Insured) का निर्धारण: – ऋणी किसानों के लिए उनके स्केल ऑफ फाइनेंस (KCC ऋण सीमा) के आधार पर। – गैर-ऋणी किसानों के लिए जिला स्तरीय तकनीकी समिति (DLTC) द्वारा प्रति हेक्टेयर अधिसूचित दर के आधार पर।
आवश्यक दस्तावेज़ — Documents Required
- आधार कार्ड (अनिवार्य पहचान प्रमाण)
- भूमि के रिकॉर्ड — खसरा, खतौनी / 7-12 / पट्टा (भूमि स्वामित्व या बटाईदारी सिद्ध करने हेतु)
- बैंक पासबुक (आधार से जुड़ा सक्रिय बैंक खाता, दावा राशि सीधे DBT से आने के लिए)
- बुआई प्रमाण पत्र / स्व-घोषणा पत्र (पटवारी या ग्राम सेवक द्वारा प्रमाणित या स्व-घोषणा)
- किराया या बटाईदार अनुबंध (बटाईदार या किराएदार किसानों के लिए)
- ऋणी किसानों के लिए: KCC खाता विवरण (बैंक द्वारा स्वतः लिंक किया जाता है)
आवेदन कैसे करें — How to Apply
ऋणी (Loanee) किसानों के लिए
स्वतः नामांकन (Auto-Enrolment): आपका संबंधित बैंक अंतिम तारीख के आसपास आपके KCC खाते से प्रीमियम राशि काटकर स्वतः बीमा कर देता है। आपको अलग से कोई आवेदन नहीं करना होता। यदि आप बीमा नहीं कराना चाहते (Opt-out), तो अंतिम तिथि से कम से कम 7 दिन पहले अपनी बैंक शाखा में लिखित घोषणा पत्र जमा करना अनिवार्य है।
गैर-ऋणी (Non-Loanee) किसानों के लिए
विकल्प 1: PMFBY पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन
- आधिकारिक वेबसाइट https://pmfby.gov.in पर जाएं और “Farmer Application” → “Enroll Yourself” पर क्लिक करें।
- अपना मोबाइल नंबर दर्ज करें और OTP व आधार e-KYC के माध्यम से पंजीकरण पूरा करें।
- अपना राज्य, जिला, तहसील और गांव/पंचायत चुनें।
- सीजन, फसल का नाम, बीमा राशि और क्षेत्रफल (हेक्टेयर में) दर्ज करें।
- जमीन के दस्तावेज (खसरा/खतौनी) और बुआई प्रमाण पत्र अपलोड करें।
- किसान प्रीमियम का ऑनलाइन भुगतान करें (UPI / नेट बैंकिंग / डेबिट कार्ड)।
- पॉलिसी रसीद और पावती (Acknowledgment Slip) डाउनलोड कर सुरक्षित रख लें।
विकल्प 2: सीएससी (CSC) या बैंक शाखा के माध्यम से
- अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या बैंक शाखा में सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ जाएं।
- सीएससी ऑपरेटर आपके पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन भरेगा → काउंटर पर किसान प्रीमियम का नकद या ऑनलाइन भुगतान करें।
- ऑपरेटर से बीमा पॉलिसी की मुद्रित रसीद (Acknowledgment) प्राप्त करें।
विकल्प 3: बीमा कंपनी के स्थानीय एजेंट या कृषि मित्र
राज्य सरकार द्वारा प्रत्येक सीजन के लिए नामित बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि और ग्राम स्तर पर कृषि मित्र किसानों के फॉर्म भरवाते हैं।
आवेदन की अंतिम तिथियां (Cut-Off Dates)
| सीजन (Season) | आवेदन की अंतिम तिथि (Deadline) |
|---|---|
| खरीफ (जून से अक्टूबर की फसलें) | 31 जुलाई |
| रबी (अक्टूबर से मार्च की फसलें) | 31 दिसंबर |
| वाणिज्यिक / बागवानी फसलें | फसल अनुसार भिन्न (राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित) |
अंतिम तिथि चूक जाने पर उस सीजन के लिए बीमा सुरक्षा नहीं मिलेगी। इसलिए सीजन की शुरुआत में ही समय रहते आवेदन कर लें।
दावा प्रक्रिया — फसल नुकसान पर क्लेम कैसे पाएं
1. स्थानीयकृत आपदा (ओलावृष्टि, जलभराव, भूस्खलन)
- आपदा होने के 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनी को सूचित करें (टोल-फ्री 14447 पर कॉल करें या क्रॉप इंश्योरेंस ऐप/पोर्टल पर सूचना दर्ज करें)।
- कृषि विभाग, बैंक और बीमा कंपनी की संयुक्त टीम किसान की मौजूदगी में खेत का संयुक्त सर्वे करती है।
- खेत में हुए वास्तविक नुकसान का सटीक प्रतिशत तय किया जाता है।
- सर्वे रिपोर्ट के आधार पर क्लेम राशि स्वीकृत होती है और 30 से 60 दिनों के भीतर सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।
2. व्यापक आपदा (पूरे क्षेत्र में सूखा या बाढ़)
- राज्य सरकार बीमा इकाई स्तर पर क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट्स (CCE) आयोजित कर औसत वास्तविक उत्पादन का आकलन करती है।
- यदि वास्तविक उत्पादन निर्धारित थ्रेशोल्ड उत्पादन (सामान्य उत्पादन के 70-80%) से कम रहता है, तो क्लेम स्वतः सक्रिय हो जाता है।
- दावा राशि की गणना = [(थ्रेशोल्ड उपज – वास्तविक उपज) / थ्रेशोल्ड उपज] × कुल बीमा राशि।
- क्लेम राशि सीधे किसान के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है।
3. कटाई के बाद नुकसान (Post-Harvest Loss)
- कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी गई फसलों (जैसे धान, सरसों आदि) को यदि 14 दिनों के भीतर चक्रवात या बेमौसम बारिश से नुकसान होता है, तो वह कवर होता है।
- नुकसान होने के 72 घंटे के भीतर 14447 पर कॉल करके या पोर्टल पर सूचना दर्ज कराना आवश्यक है।
स्थिति कैसे चेक करें — Application & Claim Status
- https://pmfby.gov.in पोर्टल खोलें और “Farmer Application Status” विकल्प पर क्लिक करें।
- अपना आवेदन क्रमांक (Application Number) या मोबाइल नंबर + OTP दर्ज करें।
- स्क्रीन पर आपको: – पॉलिसी की स्थिति (सक्रिय / पूर्ण) – क्लेम स्टेटस और ट्रांसफर विवरण – प्रीमियम भुगतान का रिकॉर्ड दिखाई देगा।
आधिकारिक हेल्पलाइन — PMFBY Helpline Numbers
| सेवा | हेल्पलाइन नंबर / लिंक |
|---|---|
| PMFBY राष्ट्रीय किसान हेल्पलाइन | 14447 (टोल-फ्री) |
| वैकल्पिक टोल-फ्री नंबर | 1800-200-7710 |
| राज्य कृषि विभाग | राज्यवार अलग-अलग हेल्पलाइन नंबर |
| आधिकारिक पोर्टल | https://pmfby.gov.in |
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अंतिम सत्यापन: 20 अप्रैल 2026. आधिकारिक स्रोत: https://pmfby.gov.in
यह वेबसाइट किसी भी सरकारी विभाग से संबंधित नहीं है। यहां दी गई जानकारी केवल शैक्षणिक और सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के लिए किसान को कितना प्रीमियम देना होता है?
खरीफ फसलों के लिए बीमा राशि का 2%, रबी फसलों के लिए 1.5% और वाणिज्यिक व बागवानी फसलों के लिए अधिकतम 5% प्रीमियम देना होता है। बाकी का सारा प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकार वहन करती हैं।
क्या ऋणी (KCC धारक) किसान फसल बीमा से बाहर (Opt-out) हो सकते हैं?
हाँ। यदि कोई ऋणी किसान बीमा नहीं कराना चाहता, तो उसे कट-ऑफ तिथि से कम से कम 7 दिन पहले अपनी संबंधित बैंक शाखा में लिखित ऑप्ट-आउट घोषणा पत्र जमा करना होगा।
PMFBY में आवेदन करने की अंतिम तिथि (कट-ऑफ डेट) क्या है?
खरीफ सीजन के लिए सामान्यतः 31 जुलाई और रबी सीजन के लिए 31 दिसंबर कट-ऑफ तिथि होती है। बागवानी व वाणिज्यिक फसलों के लिए तिथियां राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित की जाती हैं।
फसल नुकसान होने पर क्लेम मिलने में कितना समय लगता है?
स्थानीयकृत आपदाओं (जैसे ओलावृष्टि या जलभराव) के दावों का निपटारा 30 से 60 दिनों में हो जाता है। पूरे क्षेत्र में फैली आपदाओं में क्रॉप कटिंग रिपोर्ट आने के बाद 60 से 120 दिनों में क्लेम सीधे खाते में ट्रांसफर होता है।
क्या फसल बीमा से मिलने वाली क्लेम राशि पर टैक्स लगता है?
नहीं। आयकर अधिनियम की धारा 10 (कृषि आय छूट) के तहत PMFBY से प्राप्त दावा राशि पूरी तरह से आयकर से मुक्त होती है।